90 मिलियन की संख्या वाली सीपीसी नेतृत्व का पंक्तिबद्ध समूह (लाइनअप) 200 सदस्यीय केंद्रीय समिति एवं इतनी ही संख्या में वैकल्पिक सदस्यों से जाहिर है, जिनका चयन इस वर्ष के कांग्रेस में 2,287 प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा।

रेमको टैनिस/सीसी बाई एनसी-एनडी 2.0

90 मिलियन की संख्या वाली सीपीसी नेतृत्व का पंक्तिबद्ध समूह (लाइनअप) 200 सदस्यीय केंद्रीय समिति एवं इतनी ही संख्या में वैकल्पिक सदस्यों से जाहिर है, जिनका चयन इस वर्ष के कांग्रेस में 2,287 प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 19वीं पार्टी कांग्रेस अगले सप्ताह-18 अक्तूबर से बीजिंग में आरंभ हो रही है। कांग्रेस सीपीसी की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है और इसकी मुख्य भूमिका पार्टी की नीति निर्धारित करना और उन नेताओं को चुनना है जो चीन पर शासन करेंगे। 18वीं कांग्रेस के विपरीत यह कांग्रेस महासचिव का चयन नहीं करेगी क्यांकि शी जिनपिंग दूसरे कार्यकाल तक बने रहेंगे। लेकिन यह 20वीं कांग्रेस के लिए नेतृत्व पंक्ति उपलब्ध कराएगी जो सामान्य स्थितियों में नया महासचिव, जो राष्ट्रपति भी होता है, के चयन पर निर्णय करती है और साथ ही, उस व्यक्ति की पहचान भी करेगी, जो ली केकियांग के उत्तराधिकारी के रूप में प्रधानमंत्री बनेगा।

90 मिलियन की संख्या वाली सीपीसी नेतृत्व का पंक्तिबद्ध समूह (लाइनअप) 200 संख्या वाली केंद्रीय समिति एवं इतनी ही संख्या में वैकल्पिक सदस्यों से जाहिर है, जिनका चयन इस वर्ष के कांग्रेस में 2,287 प्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा। ये प्रतिनिधि प्रांतीय पार्टी इकाइयों, सरकारी उपक्रमों एवं सैन्य तथा वित्तीय संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

सीसी उनमें से एक 25 सदस्यीय पोलितब्यूरो (पीबी) का निर्वाचन करेगी और फिर पीबी एक स्थायी समिति (पीबीएससी) का चयन करेगा जो प्रभावी रूप से देश का सबसे ताकतवर शासक समूह होगा। ऐसी उम्मीदें हैं कि पोलितब्यूरो के 25 सदस्यों में से 10 तथा पीबीएससी के सात सदस्यों में से पांच सेवानिवृत्त हो जांएगे।

फिर भी, अगर अतीत से कोई सबक लिया जा सकता है तो इस कांग्रेस में शी के उत्तराधिकारी के मुद्वे पर सीपीसी के विभिन्न गुटों में निश्चित रूप से एक स्पष्ट सौदा देखा जा सकता है। तब भी, शी और ली को छोड कर पांचवी पीढ़ी के सभी नेताओं के सेवानिवृत्त होने का अर्थ यह होगा कि उनकी शक्तियां पहले की तुलना में और अधिक केंद्रित हो जाएंगी क्योंकि अब वे ऐसे नेताओं से घिरे रहेंगे जिनका चयन उन्होंने खुद ही किया है। ये पांच पीढि़यां हैं: माओ के शीर्ष पर रहते पहली पीढ़ी ; 1949-1976, हुआ गुओफेंग, हु याओबांग झाओ जियांग की दूसरी पीढ़ी ; 1976-1992, जियांग जेमिन के शीर्ष पर रहते तीसरी पीढ़ी ; 1992-2003, हु जिनताओ एवं वेन जियाबाओ के साथ चौथी पीढ़ी ; 2003-2012 एवं शी जिनपिंग-ली केकियांग के साथ वर्तमान पांचवीं पीढ़ी।


इस कांग्रेस में शी के उत्तराधिकारी के मुद्वे पर सीपीसी के विभिन्न गुटों में निश्चित रूप से एक स्पष्ट सौदा देखा जा सकता है। तब भी, शी और ली को छोड कर पांचवी पीढ़ी के सभी नेताओं के सेवानिवृत्त होने का अर्थ यह होगा कि उनकी शक्तियां पहले की तुलना में और अधिक केंद्रित हो जाएंगी।


कांग्रेस का महत्व

हम जानते हैं कि यह पूरी कांग्रेस एक नाटक से अधिक कुछ भी नहीं है क्योंकि सभी सौदे और फैसले इस समारोह से बहुत पहले ही लिए जा चुके हैं। इस कांग्रेस की सारी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी है और सारा कुछ पहले ही तय हो चुका है। पार्टी सचिव पदों, प्रांतीय राज्यपालों एवं मंत्रियों के कुछ खास पदों पर नियुक्ति से संबंधित कुछ फैसले पिछले लगभग एक साल की अवधि में लिए गए हैं। गर्मियों में आयोजित बैडेहे बैठक में पीबी एवं पीबीएससी के भीतर नेताओं की सूची पर पहले ही सर्वसहमति दिख चुकी है जो अगली सीसी, पीबी और पीबीएससी में निर्वाचित किए जांएगे। जियांग जेमिन, हु जिनताओ, पूर्व प्रधानमंत्रियों एवं पीबीएससी के सदस्यों जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ सलाह मशविरे किए जांएगे और इस सूची को इस महीने के आरंभ तक लगभग पूरी तरह अंतिम रूप दे दिया गया होगा।

वास्तव में, यह समारोह चीन के लोगों के लिए खेला जाने वाला एक प्रकार का राजनीतिक नाटक है। यह उन्हें दिखाने के लिए है कि पार्टी का शासन ही वैध है और जो लोग उन पर शासन करते हैं, उन्हें एक प्रकार की चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है जिसमें उनकी भी भूमिका होती है। इसके अतिरिक्त, चुने गए नेताओं को भी वैध दिखने के लिए समान पदस्थ लोगों से एक प्रकार का अनुमोदन लेने की आवश्यकता होती है। प्रतिनिधियों के चयन से पहले जिस प्रकार की लामबंदी तथा चर्चाएं की जाती हैं, वह वैधता के भ्र्रम को बनाये रखने की एक कवायद है, क्योंकि सीपीसी प्रणाली में किन उम्मीदवारों को चुना जाना है, इसकी सूची आम तौर पर उच्चतर संस्था द्वारा ही निर्धारित की जाती है।

लेनिनवादी लोकतांत्रिक केंद्रवादी सिद्धांत में, निर्णय ऊपर से लिए जाते हैं-उनका फैसला उच्चतर संस्था करती है और उनका अनुमोदन नीचे के स्तर पर किया जाता है और फिर उन्हें वापस भेजा जाता है। कुछ विशेष नियंत्रित स्थितियों में चुनाव भी होते हैं और कुछ चुनावों में अक्सर 10 प्रतिशत या सीटों की अपेक्षा अधिक अनुभवी उम्मीदवार होते हैं और कांग्रेसों और समितियों को मतदान करने को कहा जाता है। उदाहरण के लिए, शी अप्रैल में गुईझोउ प्रांत पार्टी कांग्रेस द्वारा प्रतिनिधि निर्वाचित किए गए थे। इसी प्रकार, पीबीएससी के अन्य सदस्य भी विभिन्न प्रांतीय समितियों या स्वायत्तशासी क्षेत्रों की समितियों द्वारा प्रतिनिधि निर्वाचित किए गए थे। उन सभी का नामांकन सीसी द्वारा प्रतिनिधियों के लिए उम्मीदवारों के रूप में किया गया था। फिर भी, अपने खुद के लिहाज से सीपीसी ने एक सामूहिक नेतृत्व का निर्माण करने और कुछ विशिष्ट नियंत्रणों एवं संतुलनों के साथ ‘अंतःपार्टी लोकतंत्र’ को प्रोत्साहित करने की इच्छा जताई है।


लेनिनवादी लोकतांत्रिक केंद्रवादी सिद्धांत में, निर्णय ऊपर से लिए जाते हैं-उनका फैसला उच्चतर संस्था करती है और उनका अनुमोदन नीचे के स्तर पर किया जाता है और फिर उन्हें वापस भेजा जाता है।


औपचारिक रूप से, कांग्रेस पिछले पांच वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में सीपीसी के कार्य की समीक्षा करेगी, अगले पांच वर्षों के लिए प्रमुख क्षेत्रों में पार्टी के कार्य के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करेगी और एक नई केंद्रीय समिति का चयन करेगी।

उल्लेखनीय है कि कम से कम डेंग युग के बाद से सीपीसी के मुद्वों एवं दृष्टिकोणों पर एक मजबूत निरंतरता बनी हुई है जो सामूहिक नेतृत्व को प्रदर्शित करती है। इसलिए, चाहे ये आर्थिक सुधार हों, या भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम, कानूनी सुधार हों ,या फिर सैन्य सुधार, 18वीं पार्टी कांग्रेस में लिए गए निर्णयों ने ही पिछले पांच वर्षों के दौरान शी जिनपिंग द्वारा उठाए गए कदमों को आकार दिया।

आगामी सीपीसी कांग्रेस के समक्ष मुद्वे

क्या कम से कम 1980 के दशक के मध्य के बाद से जारी सीपीसी की आम परंपरा, कि पार्टी कांग्रेस के समय 68 वर्ष की आयु से अधिक की किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की जाएगी, बनी रहेगी। इस पर एक प्रमुख शख्सियत, पीबीएससी के सदस्य एवं सीसीडीआई के प्रमुख वांग किशान का भाग्य निर्भर करता है। वांग पहले ही 69 वर्ष के हो चुके हैं और इस समय तक उन्हें सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए। यह नियम 2002 से ही चला आ रहा है जब जियान जेमिन 74 वर्ष की आयु में, केवल अपने उत्तराधिकारी हु जिनताओ को छोड़ कर पीबीएससी के अन्य सभी सदस्यों के साथ रिटायर हो गए थे। लेकिन जहां तक पार्टी का सवाल है तो यह महज एक परंपरा है, कोई नियम नहीं है। संविधान में कहा गया है कि राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री लगातार दो बार पांच वर्ष के कार्यकाल तक बने रह सकते हैं, इसमें सीपीसी नियमों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। अगर शी 2022 में तीसरे कार्यकाल की इच्छा व्यक्त करते हैं तो वे 69 वर्ष के हो चुके होंगे, इसलिए अगर वांग वर्तमान समय में रिटायर होते हैं तो बहुत संभावना है कि शी भी 2022 में पद छोड़ देंगे।

वांग के मामले में, सेवानिवृत्ति को छोड़ भी दें तो ऐसी चर्चा है कि वे ली केकियांग की जगह प्रधानमंत्री बन सकते हैं। सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली हसियैन लूंग तथा अमेरिका के दक्षिणपंथी विचारक स्टीव बैनन के साथ वांग की हाल की मुलाकातें वांग के लिए एक संभावित दूसरी भूमिका की ओर जरूर इशारा करती हैं।


क्या कम से कम 1980 के दशक के मध्य के बाद से जारी सीपीसी की आम परंपरा, कि पार्टी कांग्रेस के समय 68 वर्ष की आयु से अधिक की किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की जाएगी, बनी रहेगी। इस पर एक प्रमुख शख्सियत, पीबीएससी के सदस्य एवं सीसीडीआई के प्रमुख वांग किशान का भाग्य निर्भर करता है।


‘शी जिनपिंग के विचार’

वांग की किस्मत यह फैसला करेगी कि क्या शी जिनपिंग 2022 के बाद शासन के शीर्ष पर बने रहेंगे या नहीं? पीआरसी का संविधान राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के कार्यकाल को 10 वर्षों तक सीमित करता है। बहरहाल, खुद सीपीसी के लिए यह महज एक परंपरा है, कोई नियम नहीं है। अगर वांग 19वीं कांग्रेस के बाद भी बने रहते हैं तो शी के लिए भी 2022 के बाद यह मिसाल बन सकती है। 2022 के बाद शी के भविष्य को लेकर कई प्रकार के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। एक तो ‘आम लोगों के नेता’ के रूप में उनका उद्भव, जो एक ऐसी पदवी है जो माओ, डेंग शियोपिंग एवं जियांग जेमिन को प्राप्त थी। वर्तमान में, 19वीं पार्टी कांग्रेस के दौरान सीपीसी के लिए एक मार्गदर्शी सिद्धांत के रूप में ‘शी जिनपिंग के विचार’ को लागू किया जा सकता है जो शी को माओ के स्तर पर ले आएगा।

अलग उपाधि के तहत सुपर-बॉस

दूसरी बात सेना के संबंध में उनकी शक्तियों का अंबार है। उनके सैन्य सुधारों की वजह से ‘सीएमसी चेयरमैन रिस्पांसबिलिटी सिस्टम’ का अस्तित्व सामने आया है जिसने पीएलए के नेतृत्व में उनकी भूमिका को आगे बढ़ाया। अप्रैल में घोषणा की गई थी कि शी ने ‘सेंट्रल मिलेटरी कमीशन पीएलए ज्वॉयंट बैटल कमांड सेंटर में सर्वोच्च कमांडर’ का पद भार संभाल लिया है। अगस्त 2017 सैन्य परेड में, उन्हें ‘कमांडर’ की जगह ‘चेयरमैन’ संबोधित किया गया। यह माओ की तरह का दर्जा हासिल करने की दिशा में एक प्रारंभिक कदम हो सकता है जहां वह सीपीसी के ‘चेयरमैन’ न कि महासचिव, की भूमिका निभाएंगे। एक महासचिव के रूप में पीबीएससी में उन्हें सबसे ऊंचा दर्जा हासिल है, एक चेयरमैन के रूप में उन्हें पीबीएससी के भीतर वीटो का अधिकार प्राप्त हो जाएगा। एक अन्य संकेत ‘शी जिनपिंग के विचार’ के संवर्द्धन से संबंधित है जिसे इस सप्ताह आयोजित होने वाली 18वीं कांग्रेस? (कृपया इसे चेक कर लें) के 7वें पूर्ण अधिवेशन में शी के बढ़े हुए दर्जे की एक अन्य पहचान के रूप में संविधान में शामिल किया जा सकता है। शी के समर्थकों का कहना है कि वर्तमान सामूहिक नेतृत्व की शैली वास्तव में गुटबाजी एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। इसलिए, शी एक अलग उपाधि के तहत 2022 में सुपर बॉस के रूप में एक नई पारी आरंभ कर सकते हैं।

सन झेंगकाई के परिष्करण के निहितार्थ

वह 1960 के दशक में जन्मे दो पॉलित ब्यूरो सदस्यों में एक सदस्य थे जिन्हें पीबीएससी में प्रोन्नत किया जा सकता था। पीबीएससी की संरचना इस बार नाटकीय रूप से बदल जाएगी जब सात सदस्यों में पांच सदस्य रिटायर हो जांएगे, केवल शी एवं प्रधानमंत्री ली केकियांग ही बने रहेंगे। दूसरे नेता 1963 में जन्मे हु चुन्हुआ हैं, जो गुआंगडोंग प्रांत के पार्टी सचिव हैं और 2012 से पॉलित ब्यूरो के सदस्य हैं। 1960 में जन्मे एक और नेता चेन माइनर हैं। वह केवल केंद्रीय समिति के एक सदस्य भर हैं जिन्हें जुलाई में चोंगकिंग के पार्टी सचिव के रूप में सन के उत्तराधिकारी के बतौर नियुक्त किया गया था, उससे पूर्व वह गुईझोउ में पार्टी के प्रमुख थे। उम्र के लिहाज से, चेन हु से वरिष्ठ हैं जबकि हु ने पहले ही पॉलित ब्यूरो में एक कार्यकाल पूरा कर लिया है। यह तर्क दिया जा सकता है कि हु एवं चेन में, शी ने पहले ही नेतृत्व टीम की पहचान कर ली है जो उनके बाद आएगी और महासचिव के रूप में एक संभावित तीसरे कार्यकाल की अटकलबाजी, हो सकती हैं, महज अटकलें ही हों। बेशक एक मुद्वा यह है कि हु चिन्हुआ हु जिनताओ के एक आश्रित हैं और एक बार कम्युनिस्ट यूथ लीग के प्रमुख भी रह चुके हैं जिन्हें शी अब ज्यादा पसंद नहीं करते। और अगर, इनमें से कोई भी पीबीएससी में जगह बनाने में कामयाब नहीं हुआ तो हमें स्पष्ट संकेत मिल जाएगा कि हवा का रुख क्या है?

भ्रष्टाचार विरोधी

धारणाओं के विपरीत, 18वीं कांग्रेस में ही भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की पहल की गई थी और इसे अनुमोदित किया गया था, न कि शी जिनपिंग ने इसकी शुरुआत की थी। शी ने जो किया, वह था कि उसने अपनी खुद की स्थिति मजबूत बनाने के लिए पार्टी को मिले जनादेश का दोहन किया। हमें उम्मीद है कि 19वीं कांग्रेस में हमें भ्रष्टाचार को रोकने तथा यह सुनिश्चित करने कि सीपीसी शासन की वैधता भ्रष्टाचार के कारण कमतर साबित न हो, से संबंधित सभी कारगर उपाय देखने को मिलेंगे। भ्रष्टाचार के खिलाफ कदमों को और मजबूत बनाये जाने तथा इन उपायों को प्रोत्साहित किए जाने की संभावना है।

पीएलए सुधार

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शी जिनपिंग के पहले कार्यकाल में पीएलए में नाटकीय सुधार देखने को मिला है जिसका एकमात्र लाभ यही हुआ है कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत स्थिति और मजबूत बना ली है। चार शक्तिशाली साधारण विभागों (जनरल डिपार्टमेंट्स) को 15 कार्यशील इकाइयों में विभाजित कर दिया गया है और इसके सात सैन्य क्षेत्र कमानों कोे पांच थिएटर कमानों में तबदील कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, 19वीं पार्टी कांग्रेस केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी), जो सीपीसी की तरफ से पीएलए का संचालन करता है, को नया आकार देने का भी एक अवसर साबित हो सकता है। वर्तमान सीएमसी में एक अध्यक्ष (शी जिनपिंग), दो उपाध्यक्ष और आठ नियमित सदस्य (रक्षा मंत्री, वायुसेना, नौसेना तथा रॉकेट फोर्स के कमांडर एवं पहले के चार जनरल डिपार्टमेंट) हैं। पार्टी कांग्रेस के आयोजन की तैयारी के दौरान पीएलए के सभी कॉम्बैट बलों पर नियंत्रण करने वाले ज्वॉयंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख फैंग फेनघुई तथा पीएलए के वैचारिक दृष्टिकोण की निगरानी करने वाले पॉलिटिकल वर्क डिपार्टमेंट के प्रमुख जनरल झांग यांग को बर्खास्त कर दिया गया है। शी अपने लोगों को लेकर आए हैं-जनरल ली जुओचेंग, जिन्हें उन्होंने प्रोन्नत कर 2016 में नई पीएलए सेना मुख्यालय का प्रमुख बना दिया, ने जनरल फैंग की जगह ली है। और नौसेना के पूर्व राजनीतिक कमीसार एडमिरल मियाओ हुआ को जनरल झांग यांग की जगह लाया गया है। लेकिन उनमें से कोई भी अभी तक सीएमसी में नहीं है। सीएमसी के कम से कम पांच और सदस्यों को रिटायर होना है, जिसे देखते हुए शी अब सीएमसी में आमूल चूल परिवर्तन कर सकते हैं। जनरल ली एवं एडमिरल मियाओ की नई नियुक्तियों के अतिरिक्त, शी ने थलसेना, नौसेना एवं वायु सेना के नए प्रमुखों की भी नियुक्ति की है, जो संभवतः पांच थिएटर कमांडरों के साथ साथ नई सीएमसी में दिख सकते हैं। 19वी सीसी में पीएलए के प्रतिनिधित्व में भी व्यापक फेरबदल होगा। 19वीं पार्टी कांग्रेस में पीएल एवं पीएपी शिष्टमंडल से संकेत मिलता है कि 303 प्रतिनिधियों में से लगभ 90 प्रतिशत पहली बार चुने गए प्रतिनिधि हैं। सेवानिवृत्तियों एवं पदधारियों को ध्यान में रखते हुए 19वीं सीसी में पीएलए-पीएपी का अधिकांश प्रतिनिधित्व नए सदस्यों का होगा। जनरल फैंग के शुद्धिकरण से संकेत मिलता है कि पीएलए के भीतर भ्रष्टाचार रोधी मुहिम अभी समाप्त नहीं हुआ है।


शी अपने लोगों को लेकर आए हैं-जनरल ली जुओचेंग, जिन्हें उन्होंने प्रोन्नत कर 2016 में नई पीएलए सेना मुख्यालय का प्रमुख बना दिया, ने जनरल फैंग की जगह ली है।


चीन में सीपीसी का कसता शिकंजा

पार्टी कांग्रेस के आयोजन से पूर्व असंतुष्टों एवं दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की गई है। इंटरनेट को लेकर कठोर होती जा रही नीति शी जिनपिंग के अंतर्गत केंद्रीकरण और नियंत्रणों के सख्त होने की ही अभिव्यक्ति है। यह रुझान केवल इंटरनेट या वेबो (माइक्रो ब्लॉग) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यधारा मीडिया तथा व्यवसायों, जहां कथित अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कई क्षेत्रों में विनियमन सख्त किया जा रहा है, साथ ही, विश्वविद्यालयों, जहां एक बार फिर से वैचारिक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, में भी कड़ाई की जा रही है। इस रूझान में भी पार्टी कांग्रेस के बाद तेज बढोतरी होने की उम्मीद है जहां चीन में पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को कम करने के लिए नए राजनीतिक दिशानिर्देश जारी किए जाने के आसार हैं।

विदेश नीति

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ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल, बीजिंग/फ्लिकर यूजर टागोसाकु

शी जिनपिंग युग में पूर्वी सागर, दक्षिण चीनी सागर, दक्षिण एशिया एवं हिन्द महासागर क्षेत्र में चीन का दबदबा काफी बढ़ा है। चीन ने बेल्ट और रेड पहल की शुरुआत की है और चीन के राजनीतिक एवं आर्थिक हितों को वैश्विक रूप से बहुत अधिक बढ़ाया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि जो सफलता हासिल की गई है पार्टी कांग्रेस उसका अनुमोदन करेगी और शी की यह भी कोशिश होगी कि खासकर, कष्टकारी अमेरिकी नीति द्वारा उत्पन्न अराजकता एवं भ्रम को देखते हुए चीन की विस्तारवादी प्रयासों को समर्थन देने के लिए पार्टी को पूरी तरह संगठित रखा जाए।


शी जिनपिंग युग में पूर्वी सागर, दक्षिण चीनी सागर, दक्षिण एशिया एवं हिन्द महासागर क्षेत्र में चीन का दबदबा काफी बढ़ा है।


आर्थिक विकास की प्रधानता

सीपीसी के लिए वैधता का प्रमुख स्रोत लगातार जारी आार्थिक विकास है। इसे बनाये रखने के साधन एवं माध्यम बैठक की कार्यसूची के बड़े विषय होंगे। बेशक, विकास के लक्ष्य भी निर्धारित किए जाएंगे, लेकिन एक बड़ा मुद्वा बाजार अर्थव्यवस्था से जुड़े सुधारों को आगे बढ़ाने से संबंधित है। इसमें एक बड़ा सवाल सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों का सुधार और कर्ज के पहाड़ से निपटने का है। इतना ही महत्वपूर्ण निजी क्षेत्र को विकास की प्रक्रिया में शामिल करना भी है जिसकी वृद्धि दर हाल के वर्षों में गिरी है जिसकी एक वजह पार्टी के प्रमुख व्यक्तियों द्वारा लिए गए मनमाने निर्णय हैं। 2013 में हुए तृतीय विस्तृत अधिवेशन में बाजार अर्थव्यवस्था को चीन की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने की इच्छा व्यक्त की गई, लेकिन इन सुधारों का प्रतिरोध किया जाता रहा है। इस बीच, वैश्विक मंदी एवं संरक्षणवाद में वृद्धि ने भी सुधारों की राह मुश्किल कर दी, भले ही सुधार की अनिवार्यताएं हमेशा ही महत्वपूर्ण बनी रहती हैं। चीनी नेतृत्व जानता है कि यह उनके लिए ऐसा कारक है जो फैसला करेगा कि वे सफल रहेंगे या फिर विफल होंगे, लेकिन विभिन्न प्रकार के निहित स्वार्थों, जो पार्टी में भी प्रमुख पदों पर काबिज हैं, के साथ चीन के आकार की अर्थव्यवस्था में सुधार को अमली जामा पहनाना आसान काम नहीं है। हालांकि, कांग्रेस के दौरान राजनीति हावी रहेगी और उम्मीद है कि जो कुछ बदलाव होने हैं, वे इस समारोह के बाद ही होंगे।

ये लेखक के निजी विचार हैं।

Source:http://www.orfonline.org/

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